अनंत की ओर
चल पड़े हम चल पड़े हम
चिर सजग अमरत्व लेकर,
मुस्कुरा यूँ, विदा देते
बन झरोखे, मील पत्थर ,
मार्ग कंटक स्वागत समर्पित
सजग हो जीवन दे अर्पित,
सर्वथा इक नव सृजन
ध्येय विचलन सतत अर्पित ,
एकाग्र मन ईश्वरीय श्रद्धा ,
सर्व: सम : केवल समीकरण
वायु वेग संवाद संबल
ध्येय बस नित लक्ष्य भेदन ,
बस लक्ष्य बस शत लक्ष्य भेदन........
सज्ज संबल विमल दर्शन.
चल पड़े बस चल पड़े हम
शुभकामनाओ सहित चंद्रा जी को सादर समर्पित
विमल "चातक "
26-जून-2019
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