विडंबना
कौन लो के प्राणी हो तुम
कौन धरा हरियाली हो तुम
संसार विमुख करके सारा
किस पगडण्डी अनुगामी हो तुम
छोड़ के सारे जीवन सहचर
उच्च शिखर कैसा आकर्षण
सब देन निकट सब संग सदा
समतल प्रतिविम्वित उच्च शिखर
उच्च शिखर ये उच्च शिखर
कौन लो के प्राणी हो तुम
कौन धरा हरियाली हो तुम
संसार विमुख करके सारा
किस पगडण्डी अनुगामी हो तुम
छोड़ के सारे जीवन सहचर
उच्च शिखर कैसा आकर्षण
सब देन निकट सब संग सदा
समतल प्रतिविम्वित उच्च शिखर
उच्च शिखर ये उच्च शिखर
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