VIMAL MUKTAK
गुरुवार, 30 सितंबर 2010
रास्ते
रास्ते
बीच समंदर पंछी दरिया
उड़ उड़ के लहरों की टकरान
एक बूँद चालक अँखियाँ तर के
दे जाती चिर परिचित मुस्कान
शायद----------
जीना इसी का नाम है
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