साँसों की लहरों में घिरकर ,
जाने क्यों मन डूब रहा है ,
अन्तः बिह्वल बिचलित होकर,
क्रंदन स्वर क्यूँ गूँज रहा है ,
रक्त स्वत नित श्वेत श्वेत ,
मुख लाल मलिन संकेत मात्र ,
भावों की भिव्यक्ति लाचार ,
मुझ पर ये तम क्यों डोल रहा है ,
साँसों की लहरों में घिरकर,
जाने क्यों मन डूब रहा है ।
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